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Durga Puja ends in Bengal




Kolkata October 11, 2016 : Teary-eyed devotees bade an emotional farewell, as idols of goddess Durga and her children were immersed on Tuesday in lakes, and rivers and ponds of West Bengal on Vijaya Dashami, bringing to an end five days of revelry and celebration associated with eastern India’s biggest festival.

However, as decreed by the state government and the court, idols worshipped in the households or apartment complexes were to be immersed till a deadline of 6 p.m. Four household pujas were given extension till 8.30 p.m.

But reports from the 17 ghats (each having a set of stairs leading to the river) on the banks of the Hooghly said lot of idols were in the queue for the immersion even at 8 p.m.

The idols of community pujas would be immersed from Thursday. The government has decided not to allow any immersion on Wednesday on account of Muharram.

There was a festive look on the banks of the Ganga and other water bodies. With drums playing the immersion beats “Thakur thakbe kotokshon, thakur jabe bisarjan (How long will the goddess stay on earth, She will now be immersed)”, children, young and the old joined hands to slowly put the idols into the water.

At Babughat, one of the prominent immersion banks in Kolkata, the rituals picked up pace from around 3 p.m. With the large scale community puja organisers opting to immerse their idols after Moharram, mostly idols of household and apartment complex puja were immersed here on Tuesday.

“We are feeling a bit sorry as today is Dashami. Durga Puja is the time for reunion and merriment for our entire complex. We all get together and enjoy for these four days,” said Debasis Sarkar, one of the organisers of Sahana Association Puja Committee of Rajdanga.

Sad at the festival getting over for the year, there was some consolation from the loud cries of “asche bochor abar hobe (See you next year)”.

A salient feature at Babughat was the alacrity with which the premise was being promptly cleaned by the 20 KMC workers after each idol was placed in the river. The flowers and debris are washed away and the structures removed to prevent river pollution.

“We are working to keep the river clean. Separate space has been created to dump the flowers and other puja materials. The idol structures will be removed by tomorrow during the time of low tide,” said Sahahjahan, a KMC worker busy removing the earthen lamps from the river bank.

A check-in competition was seen at the Babughhat premises.

Social media portal like Facebook and Instagram went into a tizzy as the young brigade from mostly residential apartments flashed out their selfie sticks and were seen glued to their smart phones announcing their presence before anyone else on arrival to the ghat.

“There is a lot of competition among para (locality) pujas. So we thought of outshinig Athe others by checking in first and posting selfies. This is for fun as we are hooked to social media,” said Sanju, a 19-year-old devotee.

#BijoyaDashami trended heavily on Twitter all through the afternoon along with #Dussehra as posts flooded notifications of one and all.

Facebook’s new Live video facility were also used to the optimum as many were seen filming the entire immersion ceremony and huddling in groups to see the comments.

With Mahanavami over, it was now time for the goddess to return to her husband Lord Shiva at their heavenly abode in Mount Kailash after the annual sojourn to her paternal home.

Tight security arrangements were made at the rivebanks and launches were kept ready to rescue people in case of emergencies, police said.

The Dashami rituals in the morning saw married women preparing the goddess and her children for their long journey back home by smearing the deities and each other with red vermilion.

They also offered sweets to the god, and prayed for the well-being of their families and long lives of their husbands while performing these rituals.

There were long queues before sweet shops as people started visiting relatives and friends to wish each other “Shubho Bijoya (Happy Vijaya Dashami)”.

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अब नहीं दिखते कश्मीर में पत्थरबाज, कश्मीर में देश-विरोधियों के दिन गए



जम्मू कश्मीर में जाग रही उमीद :- अब हो रही अमन शांति की बाते, हो रही तरकी

जम्मू-कश्मीर, 2 अगस्त (अमित शर्मा) : जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35ए को निरस्त किए जाने की दूसरी वर्षगांठ मनाई जा रही है क्या आब जनता हे की inदो वर्षो में क्या क्या हुआ जम्मू कश्मीर में अगर नहीं तो पड़े यह पूरी रिपोट जम्मू कश्मीर की आबोहवा बदल अब बदल चुकी है पुरे जम्मू कश्मीर में आतंक के गढ़ रहे इलाकों से सरहद तक अमन की बयार बह रही है हर और तरकी की बाते हो रही है कश्मीर में अब सड़कों पर न पत्थरबाज दिखते हैं और न ही राष्ट्र विरोधी प्रदर्शन करने वाले, गांवों-शहरों में सरकारी इमारतों से लेकर सरहद तक हर और तिरंगा फहर रहा है, यहाँ तक लाल चोक में भी तिरंगा देखने को मिलता है , आतंकवाद को दरकिनार कर युवा पीढ़ी काम धंधे में जुटने लगी है जादा तर युवा देश सेवा के लिए भारतीय सेना का रुख कर रहे है पिछले दिनों सेना में भर्ती होने के लिए कश्मीर घाटी और जम्मू में बड़ी बड़ी कतारों में देखे गए युवा का देश पप्रेम देखने को मिलता है कश्मीर में बच्चे सडको में खेलते हुए नज़र आ रहे है कश्मीर में अब फ़िल्मी सितारे भी दुबारा से रुख कर रहे है और यहाँ पर फिर से फिल्मे बनाई जा रहे है कश्मीर की खूब सुरती को देखने के लिए हर और बेचने रहता है

हालांकि, कुछ इलाकों में आतंकी घटनाएं हो रही हैं, लेकिन सुरक्षा बलों के सख्त रुख के चलते ज्यादातर आतंकी व उनके मददगार गायब होने लगे हैं। बदले हालात में अब नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर भी शांति है पाकिस्तान से समझौते के बाद दोनों ओर बंदूकें खामोश हैं इसी बीच, सेना ने उड़ी की आखिरी कमान पोस्ट अवाम के लिए खोल दी है तीनों ओर से पाकिस्तान से घिरी इस चौकी पर लहराते 60 फीट ऊंचे तिरंगे के साथ आम लोगों के लिए दो हफ्ते पहले खुला कैफे एलओसी पर स्थिति को बयां कर रहा है। अब यहां नागरिकों के आने पर सफेद झंडा नहीं लगाना पड़ता श्रीनगर से उत्तरी कश्मीर के बारामुला और उड़ी की ओर जाते पट्टन वैली में हाईवे किनारे सेब के खूबसूरत बागों में लोग काम में मशगूल हैं। कभी आतंक के गढ़ रहे बारामुला में भी माहौल बदला है।

पत्थरबाजी के लिए बदनाम यहां के ओल्ड टाउन में अब हुड़दंगी नहीं दिखते हैं। बारामुला के मुज्जफर बताते हैं कि झेलम में बहुत पानी बह चुका है। आतंकवाद से लोगों को कुछ मिला नहीं, सिर्फ तबाही हुई है। एक साल से यहां अमन है। यहीं दुकान पर बैठे सफेद दाढ़ी वाले व्यक्ति से जब माहौल पर बात की तो उन्होंने सड़क के निचली ओर दफनाए आतंकियों की ओर इशारा कर कहा, हुकूमत का संदेश सबकी समझ में आ रहा है। अब कोई बचाने नहीं आएगा। काम के सिलसिले में उड़ी आए एलओसी से सटे क्षेत्र के ग्रामीण ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि कोरोना संकट में सेना उनकी बहुत मदद कर रही है।

उधर, दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग और पुलवामा में भी हालात काफी बदल रहे हैं। अनंतनाग के अनीश अहमद का कहना है कि आतंकवाद का यहां भारी नुकसान हुआ है। युवा अब इस रास्ते पर नहीं जाना चाहते। कश्मीर के लोग खुद को संभालने की कोशिश कर रहे हैं। अनुच्छेद 370 का चंद लोगों ने फायदा उठाया। बदले माहौल में अब सड़कें बनने लगी हैं। विकास के और भी काम शुरू हुए हैं। अनंतनाग के ही तारिक अहमद ने कहा कि हालात सामान्य हो रहे हैं। कुदरत ने हमें जन्नत बख्शी है, लेकिन दहशतगर्दी से घाटी बदनाम हो गई। अब लोगों को सब समझ में आ रहा है। उम्मीद है जल्द ही कश्मीर पर्यटकों से फिर गुलजार होगा ।

अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में पत्थरबाजी की घटनाओं में काफी कमी आई है। घाटी में साल 2019 में पथराव की 1999 घटनाएं सामने आईं, जबकि 2020 में 255 बार ही पत्थरबाजी हुई। इस साल 2 मई को पुलवामा के डागरपोरा में मुठभेड़ के दौरान आतंकियों को बचाने के लिए लोगों ने पथराव किया। इसके बाद बारपोरा में 12 मई को भी नकाबपोशों ने पथराव किया था। इसके अलावा साल 2021 में पत्थरबाजी की कोई बड़ी घटना सामने नहीं आई है। इससे पूर्व 2018 और 2017 में पत्थरबाजी की , 1458 और 1412 घटनाएं दर्ज हुईं थीं।

बदली आबोहवा में अब कश्मीरी पंडित भी लौटने लगे हैं। धार्मिक महत्त्व के मट्टन में कभी कश्मीरी पंडितों के 500 से ज्यादा परिवार रहते थे, लेकिन 1990 में बदली परिस्थितियों ने उन्हें अपना घर-गांव छोड़ने पर मजबूर कर दिया। मट्टन के ऐतिहासिक मंदिर में वर्षों से सेवा कर रहे वयोवृद्ध सुरेंद्र खेर ने बताया कि कश्मीरी पंडित अब लौट रहे हैं। मट्टन में कश्मीरी पंडितों के 20 परिवार हो गए हैं। करीब 30 वर्ष पहले पलायन कर गए लोग फिर घाटी में मकान बना रहे हैं। उनका कहना है कि कश्मीर बदल रहा है। सभी अमन चाहते हैं।
कोरोना के चलते भले ही लोग घरों से कम निकल रहे, लेकिन कश्मीर की दिलकश वादियां पर्यटकों को खींचने लगी हैं। बदले हालातों का पर्यटन पर असर दिखने लगा है। पर्यटन कारोबारियों का कहना है कि इस साल शुरू में काफी सैलानियों ने घाटी का रुख किया। पहलगाम में पर्यटन से जुड़े फयाज और जावेद अहमद का कहना है कि जनवरी- फरवरी में बड़ी तादाद में पहुंचे पर्यटकों ने उम्मीद जगाई है। बेशक, इसके बाद कोरोना की दूसरी लहर ने सब कुछ चौपट कर दिया लेकिन आने वाले समय में फिर कश्मीर पर्यटकों की पहली पसंद होगा। उधर, श्रीनगर में डल झील किनारे भी सुबह-शाम रौनक दिखने लगी है। हालांकि, पर्यटक कम हैं, लेकिन लोग बेफिक्र होकर परिवार के साथ टहल रहे हैं ।

वाही दूसरी और नियंत्रण रेखा पर संघर्ष विराम के छे महीने पूरे होने पर राजौरी और पुंछ जिले में सीमा पर रहने वाले लोग ऐसे ही शांति बने रहने की भगवान से प्रार्थना कर रहे हैं, राजौरी जिले में 120 किलोमीटर और पुंछ में 90 किलोमीटर तक फैली नियंत्रण रेखा से लगे गांवों में रहने वाले लोग सीमा पर गोलाबारी में जान-माल की हानि के कारण भय और पीड़ा से भरा जीवन व्यतीत करते थे। राजौरी में नियंत्रण रेखा के सटे 50 से अधिक गांव और पुंछ जिले में लगभग 30 गांव हैं। राजौरी के चार गांव घनी आबादी वाले हैं, जो कांटेदार तार के आगे स्थित हैं, जबकि आठ गांव पुंछ जिले में कंटीले तार से आगे स्थित हैं। राजौरी के नोशहरा सेक्टर के डिंग के सरपंच रमेश चौधरी ने कहा कि हमारे गाव में आए दिन गोला बारी होती थी कठुआ से ले कर पूँछ तक गोला बारी होती थी पाकिस्थान द्वारा संघर्ष विराम किया जाता था अब दोनों देशो ने एक साथ जो फेसला लिया था उस से लोगो में आज ख़ुशी का महोल है ।

क्यों की संघर्ष विराम को बंद हुए छे महीने हुए है संघर्ष विराम उल्लंघन में कई लोगों की मौत और कई लोगों के घायल होने के साथ-साथ दर्जन से अधिक घरों को नुकसान पहुंचा है। गोलाबारी के डर से हम फसल की बुआई व कटाई भी ठीक से नहीं कर पा रहे थे अपने खेतो में नहीं जा पाते थे कही आ जा नहीं सकते थे उन्होंने कहा की आज में दोनों देशो को मुबारख बात देते हुए जो आज छे महीने हो गए और गोला बारी नहीं हुई उन्होंने कहा की सीमा पर रहने वाले लोगो में ख़ुशी का महोल है क्यों की गोला बारी में दोनों देशो में जब गोला बारी होती थी तो गरीब ही मारा जाता था दोनों तरफ उन्होंने कहा की आज हमारे बच्चे पड़ाई कर रहे है किसान फसल काट रहा है बिना किसी डर के उन्होंने कहा की में दोनों देश की जनता और सरकार को मुबारख देता हु उन्होंने आगे कहा कि सौ दिन एक सपने के सच होने की तरह हैं, जहां एलओसी पर एक भी गोली नहीं चलाई गई है और एक अप्रत्याशित शांति बनी हुई है ।

केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजन के बाद अब ऐसे अनुमान लगाए जा रहे हैं कि केंद्र की मोदी सरकार भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव कराने को लेकर तैयारी शुरू करने जा रही है. जम्मू कश्मीर में परिसीमन भी किया जा रहा है ताकि सभी को बराबर का हक़ मिले कश्मीर को अपना और जम्मू को अपना हक़ मिले,. जम्मू कश्मीर में आने वाले समय में काफी बदलाव होगा केंद्र कश्मीर में युवाओ को रोज़गार देने का प्रयास कर रहा है कश्मीर हो या फिर जम्मू बदलाव हो रहा है , कश्मीर में जहा एक समय में जाने से लोग डरते थे अब वाही लोग कश्मीर का रुख कर रहे है अब हर कोई कश्मीर में जाना चाहता है ।

राजौरी के नोशहरा इलाके के भवानी गाव के सरपंच सुनील चोधरी ने भारतीय और पाकिस्तानी सेनाओं के बीच इस संघर्ष विराम समझौते को प्रभावी बताते हुए कहा कि दोनों पक्षों की सेनाओं के बीच शांति प्रक्रिया को इसी तरह से कायम रखने के लिए कदम उठाने चाहिए। हम गांव में रहते हैं और एलओसी पर एक भी गोली ग्रामीणों द्वारा स्पष्ट रूप से सुनी जाती है। कई बार लगातार भारी गोलाबारी रात की नींद हराम कर देती थी और हम लोग दहशत में रहते थे उन्होंने कहा की हम ने कई बार आवाज़ उठाई थी की इस संघर्ष विराम उल्लंघन को बंद किया जाए उन्होंने कहा की हमारे बच्चे आज पड़ाई कर रहे है उन्होंने कहा की इन सो दिनों में हमारे सीमा के लोगो ने ख़ुशी से गुज़ारे वाही दूसरी और नोशहरा के रहने वाले रोहित चोधरी ने संघर्ष विराम उल्लंघन को बाद हुए और एक सो दिन पुरे होने पर भारत और पाकिस्थान देश को बधाई दी उन्होंने कहा की जब भी गोला बारी होती थी तो दोनों देश के हालत खराब होते थे ।

उन्होंने कहा की सो दिन से दोनों और शांति बनी हुई है और सीमा पर रहने वाले लोग अमन और शांति से आज जी रहे है में दोनों और की सरकारों से मांग करता हु की इसी तहरा हमशे के लिए शांति बनी रहे ताकि सीमा पर रहने वाले लोग अमन और चेन की जिंदगी गुज़ार सके , 26 फरवरी के बाद से एलओसी पर एक भी गोली नहीं चलाई गई है जो दर्शाता है कि संघर्ष विराम समझौता पूरी तरह से प्रभावी है

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Himachal Pradesh

CM जय राम ठाकुर ने करीब सवा करोड़ की 9 विकास परियोजनाओं का किया शिलान्यास




धर्मशाला, 31 जुलाई (गौरव सूद) : मुख्यमंत्री ने फतेहपुर के वजीर राम सिंह स्टेडियम में राज्य सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के ‘लाभार्थी सम्मलेन’ की अध्यक्षता करते हुए राय की उप तहसील खोलने, हाई स्कूल बड़ौत को राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला में स्तरोन्नत करने, नागोह को चैनलाइज करने की घोषणा की. कुंडल खुद, गुरु रविदास मंदिर परिसर, पटवार सर्कल, नंगल में रिटेनिंग वॉल के लिए 10 लाख रुपये, विजार सिंह डिग्री कॉलेज डेहरी (फतेहपुर) में एमए हिंदी और एम कॉम की कक्षाएं शुरू करने और इस कॉलेज को पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज के रूप में अपग्रेड करने के लिए।

उन्होंने क्षेत्र के लिंक रोड और अन्य कार्यों के लिए 2 करोड़ रुपये की घोषणा की, जिसमें डायना से कुलाला तक लिंक रोड शामिल है। डायना, ग्राम पंचायत धियाना में बाबा बालक नाथ मंडी ढियाना के पास रिटेनिंग वॉल, रविदास मंदिर से जी.पी. कुटवासी, जी.पी. में पुखर तालाब से शमशानघाट तक सड़क।

कुटवासी, ग्राम पंचायत चकबाड़ी में शहीद बाबू राम के घर की मुख्य सड़क से सड़क, मुख्य सड़क से ग्राम मिथल, ग्राम घनबियाल, खरा लहर, लुठियाल स्कूल, तडोली से सुनार तक सड़क की मरम्मत/रखरखाव, थाठ से लिंक रोड का निर्माण जाट बेल्ली को, घाट से कोहलारी तक लिंक रोड का निर्माण, मल्हंता से रुरी तक लिंक रोड का निर्माण, मोच से चट्टा तक लिंक रोड का निर्माण (खंड जगनोली से चट्टा), जगनोली भट्टा बरुना भवरा से लिंक रोड का निर्माण, लिंक का निर्माण. झिकली टकवाल से मोहला तखाना बड़ियाली तक सड़क का निर्माण, गांव बत्राहन में स्वतंत्रता सेनानी श्री बचितर सिंह के घर तक मुख्य सड़क से लिंक रोड का निर्माण, सकोह जोगियां से हरिजन बस्ती तक लिंक रोड का निर्माण, पट्टी से हरिजन बस्ती मंजोली तक लिंक रोड का निर्माण और डकियारा बराल से दुरहाग रायली तक लिंक रोड का निर्माण।

स्थानीय भाजपा नेता बलदेव ठाकुर ने कहा कि क्षेत्र विकास के मामले में पिछले कई वर्षों से उपेक्षित है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के वर्तमान कार्यकाल ने यह सुनिश्चित किया है कि इस क्षेत्र को भी विकास के मामले में उसका हक मिले। इस दौरान उपायुक्त डॉ निपुण जिंदल ने मुख्यमंत्री, अन्य गणमान्य व्यक्तियों और राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों का स्वागत किया। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई विभिन्न विकास योजनाओं और कांगड़ा जिले में लाभान्वित लाभार्थियों की संख्या का भी विवरण दिया।इस दौरान सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री सरवीन चौधरी, उद्योग मंत्री बिक्रम सिंह, अध्यक्ष वूलफेड त्रिलोक कपूर विधायक राजेश ठाकुर, विधायक इंदौरा रीता धीमान, कांगड़ा केंद्रीय सहकारी बैंक के अध्यक्ष राजीव भारद्वाज, पूर्व विधायक मनोहर धीमान, उपाध्यक्ष राज्य लघु बचत बोर्ड संजय गुलेरिया, करतार पठानिया सहित अन्य लोग उपस्थित थे।

मंत्रियों व पदाधिकारियों ने पढ़ें पार्टी पक्ष में कसीदे

वन मंत्री राकेश पठानिया ने कहा कि यह फतेहपुर के लोगों के लिए उचित समय है कि वे प्रदेश सरकार की नीतियों और योजनाओं के सहयोग के लिए आगे आएं। उन्होंने कहा कि वर्तमान प्रदेश सरकार राज्य का समग्र और समुचित विकास सुनिश्चित कर रही है।
राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती ने कहा कि मुख्यमंत्री ने दूसरी बार फतेहपुर क्षेत्र का दौरा किया है जो फतेहपुर क्षेत्र के विकास के प्रति उनकी चिन्ता को दर्शाता है। मुख्यमंत्री स्वयं एक साधारण पृष्ठभूमि से संबंध रखते हैं और प्रदेश के लोगों की विकासात्मक अपेक्षाओं से भली-भांति परिचित है।यह केवल भाजपा में ही सम्भव हो सकता है क्योंकि यह कार्यकर्ताओं की पार्टी है जबकि कांग्रेस एक परिवार की पार्टी है।

पूर्व सांसद कृपाल परमार ने कहा कि मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर के सशक्त नेतृत्व में वर्तमान प्रदेश सरकार ने राज्य में विकास के नए युग की शुरूआत की है और फतेहपुर क्षेत्र के साथ प्रदेश भर में अभूतपूर्व विकास हो रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री को फतेहपुर क्षेत्र की विभिन्न विकासात्मक मांगों से अवगत करवाया।

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अब पेगासस का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगी सरकारें, बवाल के बीच NSO ने क्लाइंट्स को किया ब्लॉक



यरुशलम, 30 जुलाई (live24india) : इजरायल की साइबर सिक्योरिटी फर्म एनएसओ ने दुनिया भर की सरकारों को पेगासस स्पायवेयर बेचने पर रोक लगा दी है। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक भारत समेत कई देशों में इस स्पायवेयर के गलत इस्तेमाल को लेकर मचे विवाद के बाद कंपनी ने यह फैसला लिया है।

इस स्पायवेयर का इस्तेमाल करने वाले सरकारी क्लाइंट्स को ही इजरायली कंपनी की ओर से सेवाएं दी जाती रही हैं। लेकिन विवाद के बाद उस पर रोक लगा दी गई है। नाम उजागर न करने की शर्त पर एनएसओ के एक कर्मचारी ने बताया कि सरकारी क्लाइंट्स को ब्लॉक कर दिया गया है।

हालांकि कंपनी के कर्मचारी ने यह जानकारी नहीं दी है कि किन सरकारों को कंपनी ने यह स्पायवेयर बेचा है और किन पर यह रोक लगाई गई है। कंपनी की ओर से यह फैसला इजरायल की अथॉरिटीज की ओर से एनएसओ के दफ्तर पर जांच के लिए पहुंचने के एक दिन बाद लिया गया है।

भारत समेत कई देशों के मीडिया संस्थानों ने एक साझा रिपोर्ट में दावा किया है कि पेगासस का इस्तेमाल कर 50,000 से ज्यादा लोगों की जासूसी की गई है। इन लोगों में विपक्षी नेता, पत्रकार, सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारी समेत कई लोग शामिल हैं। 18 जुलाई को प्रकाशित हुई इस रिपोर्ट के बाद से भारत में भी हंगामा बरपा है।

यही नहीं संसद के दोनों सदनों में भी मॉनसून सेशन में हंगामा जारी है। एनएसओ के कर्मचारी ने नाम उजागर न करने की शर्त पर कहा कि कई क्लाइंट्स को लेकर जांच चल रही है। इनमें से कुछ क्लाइंट्स को दी जा रही सर्विसेज को सस्पेंड कर दिया गया है।

हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि किन देशों की सरकारों और उनकी एजेंसियों पर रोक लगाई गई है। कर्मचारी ने कहा कि इजरायली डिफेंस मिनिस्टर ने कंपनी पर क्लाइंट्स को नाम उजागर करने पर रोक लगाई है। एनएसओ की आंतरिक जांच में ऐसे कुछ लोगों के फोन नंबरों को भी चेक किया गया है, जिन्हें संभावित टारगेट की लिस्ट में शामिल किया गया था।

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