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सर फ्रेंकलिन ने बिजली के क्षेत्र में खोज कार्यों के साथ कई तरह के सिद्धांत भी दिए है : डा.ग्रोवर

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जालंधर/कपूरथला, 17 जनवरी (सोनिया ): पुष्पा गुजराल साइंस सिटी की ओर से महान विज्ञानी विज्ञानी सर बैंजामिन फ्रेंकलिन के जन्मदिन पर एक वेबिनार का आयोजन किया गया। इस वेबिनार में पंजाब के अलग-अलग स्कूलों से 100 के करीब विद्यार्थियों व अध्यापकों ने भाग लिया। विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए साइंस सिटी के डायरेक्टर डा.राजेश ग्रोवर ने कहा कि आज का दिन महान विज्ञानी सर बैंजामिन फ्रेंकलिन की ओर से की गई खोजों को सुविधाजनक बनाने की आशा से मनाया जाता है।

सर फ्रेंकलिन ने बिजली के क्षेत्र में बहुत अहम खोज कार्यों के साथ-साथ कई तरह से सिद्धांत भी दिए है। उन्होंने विज्ञान के क्षेत्र में सर फ्रेंकलिन की ओर से डाले योगदान की चर्चा करते हुए बताया कि कैसे उनके द्वारा कुदरत के अलग-अलग पहलुओं का निरीक्षण किया गया है। सर फ्रेंकलिन की ओर से मेडिकल कैथीटर, लाइटनिंग रॉड, फ्रेंकलिन स्टोव, कैरिज ओडमीटर, बायोफोकल व संगीतक साजों आदि की खोजें की है।

उनकी सोच एक दायरें तक ही सीमित नहीं थी। उनका यह विश्वास था कि सिरजना के लिए हमें पहले समस्या की पहचान होनी चाहिए और फिर उसके पुख्ता हल ढूंढने चाहिए।

डा.ग्रोवर ने विद्यार्थियों को जानकारी देते हुए बताया कि साइंस सिटी में बहुत जल्द ही बिजली पर आधारित एक गैलरी स्थापित की जा रही है। इस गैलरी में बिजली से सबंधित विज्ञानिकों की सभी खोजों को बहुत दिलचस्प ढंग से दिखाया जाएगा ।

वेबिनार में इंडियन इंस्टीच्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च मोहाली के भौतिक विज्ञान विभाग के प्रोफैसर डा.जसजीत सिंह बागला मुख्य प्रवक्ता के तौर पर उपस्थित हुए। उन्होंने “अंतरिक्ष से गहरे अंतरिक्ष की खोज: भारत के प्रयत्न’ विषय पर एक विशेष लेक्चर दिया। उन्होंने भारत सरकार की ओर से अंतरिक्ष की खोजों सबंधी शुरु किए गए प्रोग्रामों की जानकारी देते हुए विद्यार्थियों को इस क्षेत्र की तरफ प्रेरित किया।

भारत की ओर से 2015 में शुरु किए गए एस्ट्रोसैट उपग्रह के जरिए एक ही समय में कई तरंगों की लंबाई से अंतरिक्ष वस्तुओं को देखा जा सकता है। ऐसे प्रयत्नों से ही खगोल विज्ञान आसमान का निरीक्षण व नई अंतरिक्ष घटनाओं की खोज करने के समर्थ बना है। उन्होंने बताया कि भारतीय खगोल विज्ञान बहुत से यंत्रों पर काम कर रहे है। इसलिए खगोल विज्ञान भविष्य में बहुत सुनहरी है।

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साइंस सिटी ने मनाया अंतरराष्ट्रीय जैविक विभिन्नता दिवस

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कपूरथला 20 मई (live24india) :- सभी स्त्रोत व सेवाएं जैविक विभिन्नता से ही मिलते है और धरती को सेहतमंद बनाने के लिए इनकी बहुत अहम भूिमका है। हालांकि हममें से बहुत से लोग जानबूझ कर जैविक विभिन्नता को नुक्सान नहीं पहुंचाते है। लेकिन बहुत सी कार्रवाही जैसे जंगलों की कटाई, जंगली जीवों के ठिकाणों पर कब्जे करने व उनके खात्में, साल में एक से अधिक फसलों को लेने की लालसा समेत मानव गतिविधियों के कारण जलवायु इतनी तेजी से बदल रहा है कि इसने कुदरत को भी पीछे छोड़ दिया है।

खोज यह संकेत करती है कि विश्व की जीडीपी में वार्षिक 40 ट्रिलियन रुपए व एक करोड़ से अधिक नौकरियां जैविक विभिन्नता के क्षेत्र का योगदान है। इसलिए जैविक विभिन्नता के स्त्रोतों को बचाने के लिए सकारात्मक कदम उठाने बहुत जरुरी है। यह बात सचिव विज्ञान टेक्नालोजी व पर्यावरण पंजाब राहुल तिवाड़ी ने पुष्पा गुजराल साइंस सिटी की ओर से अंतरराष्ट्रीय जैविक विभिन्नता दिवस सबंधी शुरु की गई 22 दिवसीय 22 एक्शन मुहिम के समापन समारोह मौके करवाए गए वेबिनार दौरान कही।

साइंस सिटी की डायरेक्टर जनरल डा.नीलिमा जेरथ ने बताया कि हर देश का अपने जैविक स्त्रोतों पर संप्रभुता संपन्न अधिकार है। इसलिए हम सभी का कर्त्तव्य व जिम्मेवारी बनती है कि जैविक विभिन्नता की संभाल के साथ-साथ इनसे होने वाले लाभ भी समान वितरण व स्थायी प्रयोग को यकीनी बनाया जाए। धरती को सेहतमंद रखने व आर्थिक मजबूती के लिए जैविक विभिन्नता की संभाल का संदेश फैलाने की बहुत जरुरत है।

पुष्पा गुजराल साइंस सिटी की ओर से अंतरराष्ट्रीय जैविक विभिन्नता दिवस मनाने को लेकर तैयार किए प्रोग्राम अनुसार 1 मई से 22 मई तक 22 दिवसीय 22 कार्यों की शुरुआत मुहिम के अधीन गतिविधियों व वेबिनारों की श्रृंखला चलाई गई। यह मुहिम जैविक विभिन्नता को बचाने व धरती को सेहदमंद रखने के उद्देश्य से चलाई जा रही है। इस मुहिम को इन दिनों दौरान काफी बढ़ावा मिला है। पजाब की बहुत सी विद्ययक संस्थाओं के विद्यार्थियों व अध्यापकों ने इस मुहिम दौरान करवाए गए कार्यों में भाग लिया। इस मुहिम तहत सभी प्रोग्राम व सरगर्मियां राष्ट्रीय जैविक विभिन्नता अथारिती भारत सरकार व वैस्ट सीड इंिडया प्राइवेट लिमटिड के सहयोग से करवाए जा रहे है।

साइंस सिटी की विज्ञानी डा.लवलीन बराड़ व शिक्षा सहायक कमलजीत कौर ने मुहिम दौरान किए गए कार्यों की रपोर्ट पेश की। इस मौके संयुक्त राष्ट्र के पर्यावरण प्रोग्राम (यूएनईपी) की पर्यावरण सलाहकार गायत्री राघवा ने मुख्य प्रवक्ता के तौर पर शामल होते हुए कहा कि आज का दिन हमारे भोजन व सेहत को बनाए रखने के लिए जैविक विभिन्नता की संभाल प्रति जागरुक होने व काम करने का मौका देता है।

संयुक्त राष्ट्र विकास प्रोग्रामों की स्थायी विकास के लक्ष्यों की कोआर्डीनेशन सेंटर से नविंदता माथुर ने जैविक विभिन्नता से सबंधित अलग-अलग लक्ष्यों व इसकी संभाल के लक्ष्यों की प्राप्ति कैसे की जा सकती है के बारे मे जानकारी दी। पंजाब जैविक विभिन्नता बोर्ड के प्रमुख विज्ञानी गुरहिरमिंदर सिंह ने बताया कि राज्य में जैविक विभिन्नता एक्ट 2002 को लागू करना बोर्ड की जिम्मेवारी है और जिला स्तर पर बनाई गई जैविक विभिन्नता प्रबंधक कमेटियां सराहनीय कार्य कर रही है।

खोज डायरेक्टर ईस्ट वैस्ट सीड्ज प्राइवेट लिमिटेड गरीश पाटिल ने बताया कि इस कंपनी का उद्देश्य वातावरण व जैविक विभिन्नता की रक्षा के लिए वचनबद्ध प्रोग्रामों को वित्तीय सहायता देना है। जोकि हर कारोबार को चलाने के लिए बहुत जरुरी है। इसके साथ जागरुकता, संभाल की जरुरत व धरती पर जीवन के असिस्तत्व के लिए बुनियादी महत्व के मुद्दे जैविकों की रक्षा का प्रबंध कर रहे है।

साइंस सिटी के डायरेक्टर डा.राजेश ग्रोवर ने कहा कि जैविक विभिन्नती की सुरक्षा व संभाल के लिए ठोस प्रबंध होने बहुत जरुरी है। बढ़ती हुई आबादी, ग्रीन हाऊस गैसों की निकासी में हो रही दिन ब दिन बढ़ौतरी व दुनिया के कई हिस्सों में पानी, भोजन की कमी व लकड़ी के बालन के प्रयोग कारण जैविक विभिन्नता का नुक्सान हो रहा है।

इस मौके पाइनर इंटरनेशनल स्कूल रुड़का कलां, कमला नेहरु पब्लिक स्कूल फगवाड़ा व डीएवी माडल हाई स्कूल कपूरथला को जैविक विभिन्नता की संभाल के लिए शुरु की गई मुहिम दौरान बढ़िया प्रदर्शन करने वाले स्कूल घोषित किए गए है। इसके साथ ही एसएमवी कालेज जालंधर, सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल गोबिंदगढ़, सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल टेरा, सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल गौहर, डीएवी एडवर्ड गंज सीनियर सेकेंडरी स्कूल मलोट व मैपल इंटरनेशनल स्कूल गोराया को प्रशंसा पत्र से सम्मानित किया गया। इस दौरान बच्चों के फोटोग्राफी, पोस्टर बनाने व ऊर्जा के ऑडिट मुकाबले करवाए गए। जिसमें विजेता रहे बच्चों को सम्मानित भी किया गया।

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जैविक विभिन्नता एक्ट अधीन अधिक लाभ व सहिभागता के विषय पर वेबिनार का आयोजन

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कपूरथला, 18 मई  (Live24India) :-  पुष्पा गुजराल साइंस सिटी की ओर से संयुक्त राष्ट्र की सेध पर राष्ट्रीय जैविक-विभिन्नता दिवस मनाने के तय किए प्रोग्रामों की शुरु की गई मुहिम के तहत “जैविक विभिन्नता एक्ट अधीन अधिक लाभ व सहिभागता’ के विषय पर एक वेबिनार का आयोजन किया गया।

इस मौके मुख्यातिथि के तौर पर राष्ट्रीय जैविक विभिन्नता अथार्टी के सचिव जस्टिन मोहन आईएफएस उपस्थित हुए। उन्होंने जैविक स्रोतों और जैविक-विभिन्नता एक्ट 2002 पर रोशनी डालते कहा कि यह एक्ट जैविक-विभिन्नता की सांभ-संभाल के साथ-साथ इनकी स्थाई एक्ट और सभी को बराबर लाभ देने की व्यवस्था करता है। उन्होंने कहा कि उद्योग और अधिक लाभ सहिभागता (एबीएस) की सेध अनुवशक जैविक स्रोतों तक पहुंच और इनको प्राप्त करने की प्रक्रिया प्रति हमें जागरुक करती है।

इस मौके राष्ट्रीय जैव-विभिन्नता अथार्टी के डा. जे सुंदरापाडी प्रोजेक्ट अधिकारी जैव-विभिन्नता वित पहलकदमी ने जानकारी देते बच्चो को अधिक लाभ सहिभागता की राष्ट्रीय व कोमी महत्ता से जागरुक करवाया। साइंस सिटी की डायरैक्टर महासचिव डा. नीलिमा जेरथ ने बताया कि एक अनुमान के मुताबिक जैविक-स्रोत दुिनया में 125 ट्रिलीयन डालर की सेवाएं देते है। इसके अलावा साइंस सिटी द्वारा राष्ट्रीय अजायबघर दिवस भी मनाया। साइंस सिटी की डायरैक्टर जनरल डा. नीलिमा जेरथ ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के स्थाई विकास के लक्ष्यो को लागू करवाने के लिए अजायब घर बहुत अहम रोल अदा कर सकते है।

राष्ट्रीय कौंसल ऑफ साइंस म्यूजियम के पूर्व डिप्टी डायरैक्टर जनरल डा. जैंता स्थानापति मुख्य प्रवक्ता के तौर पर उपस्थित हुए। उन्होंने कहा कि लोग विज्ञानिक विकास जैसे कि दवाईयां, जलवायु परिवर्तन और दूर संचार आदि में बहुत दिलचस्पी ले रहे है। इस मौके राष्ट्रीय कौंसल ऑफ साइंस म्यजियम के पूर्व डायरेक्टर जनरल जीएस रुटेला भी उपस्थित थे।

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अनुवांशिक तौर पर जेनेटिक मॉडिफिकेशन आग्रेजम का निरीक्षण व प्रभावों के विषय पर करवाया वेबिनार

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कपूरथला, 17 मई  (Live24India) :- पुष्पा गुजराल साइंस सिटी की ओर से अंतरराष्ट्रीय जैविक विभिन्नता दिवस मनाने के लिए तैयार किए प्रोग्राम अनुसार 1 मई से 22 मई तक 22 कार्यों की शुुरु की गई मुहिम के अधीन गतिविधियां व वेबिनारों क आयोजन किया जा रहा है। यह मुहिम जैविक विभिन्नता को बचाने व धरती को सेहतमंद रखने के उद्देश्य से चलाई जा रही है। इसी मुहिम के तहत अनुवंशिक तौर पर जेनेटिक मॉडिफिकेशन आग्रेजम का निरीक्षण व प्रभावों के विषय पर एक वेबिनार का आयोजन किया गया। वेबिनार में राष्ट्रीय खेतीबाड़ी विज्ञानी अकेडमी के सचिव व ग्लोबल प्लांट कौंसल के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर के मेंबर डा.प्रो.के.सी बांसल मुख्य प्रवक्ता के तौर पर शामिल हुए।

डा.बांसल ने जानकारी देते हुए बताया कि खेती के पौधे संशोधित जीवों की एक सबसे बढ़िया उदाहरण है। खेतीबाड़ी में अनुवंशिक इंजीनियरिंग तकनीकें जहां खेती की फसलों की पैदावार बढ़ाने, भोजन या दवाईयों के उत्पादन लागत घटाने में सहायक हो, वहीं इनसे कीटनाशक दवाईयों की घटती जरुरत ने पौष्टिक तत्वों की रचना, कीड़ों व बीमारियों की रोधकता, भोजन सुरक्षा व दुनिया की बढ़ती जनसंख्या के लिए डाक्टरी सहूलतों में बढ़ौतरी हुई है।

इसके अलावा ऐसी तकनीकों से थोड़े समय दौरान पकने वाली फसलों में बेहद तरक्की की हुई है और यह फसलें एलुमिनियम, बोर्न, नमक, सूखा, ठंड व अन्य पर्यावरण तबदीली को भी सहन कर सकती है। पैदावार को बढ़ाने व बीमारियों के खतरों को घटाने के लिए बहुत से जानवरों को भी अनुवंशिक तौर पर इसके घेरे में लाया जा रहा है।

साइंस सिटी की डायरेक्टर जनरल डा.नीिलमा जेरथ ने कहा कि कुछ वर्षों के दौरान सिंथेटिक तकनीकें अनुकूल तकनीकों के एक ऐसे साधन के तौर पर उभर कर सामने आई है, जिनके जरिए लोग डीएनए का अध्ययन, व्याख्यान, संसोधन व डिजाइन तैयार करने के योग्य बना है। इनसे ही धरती के जीवों की प्रजातियों व पर्यावरण तक पहुंच कर इन सैलों व रुपों पर कार्यों के प्रभावों बारे तेजी से पता लगाया जाता है।

इसके अलावा अनुवंशिक तौर पर उन्नत फसलों ने संभाल के ऐसे तरीकों को अपनाया है, जिनसे कीटनाशक दवाईयों के प्रयोग को घटा कर जड़ी बूटियों के लिए शाखाओं का वातावरण पैदा किया जा रहा है। इन तकनीकों के पर्यावरण व हमारी सेहत पर अधिक से अधिक सकारात्मक प्रभाव होने चाहिए। यदि कोई नाकारात्मक प्रभाव है तो उसे कम करने के लिए हर टेक्नोलॉजी का प्रयोग बड़े ध्यान व सावधानी से करना चाहिए।

इससे पहले इस मुहिम के तहत कारोबारी घराणों का सामाजिक व्यवहार व जि्मेवारी के ‌िवषय पर भी एक वेबिनार का आयोजन िकया गया। इस वेबिनार में कन्या महाविद्यालय कालेज जालंधर की सहायक प्रोफेसर डा.नरिंदरजीत कौर ने जानकारी देते हुए बताया कि बहुत से कारोबारी जैव विभिन्नता पर निर्भर है। निर्भरता का स्तर अलग-अलग क्षेत्रों के लिए अलग-अलग हो सकता है। लेकिन जैविक विभिन्नता का नुक्सान हम सबके लिए खतरा है।

यदि विभिन्नता को बचाने के लिए आवश्यक कदम न उठाए गए तो इससे भोजन सप्लाई की कमी के साथ-साथ हमारे अर्थव्यवस्था को बड़ा नुक्सान सहन करना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि श्रृंगार (कॉस्मेटिक) व दवाईयों के उद्योग आदि में बहुत से हानिकारक रसायण के प्रयोग करने से पर्यावरण को नुक्सान पहुंच सकता है। इसलिए इन उद्योगों को शाकाहारी बदलाव ढूंढने चाहिए।

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